Monday, May 13, 2013

फूल मूल कर बात






से दिन कहे लागलक फूल जइर से 
'खाद में गड़ाल  हिस कोन तप कईर के ?'
धरती से जइर हँसलक , 'ना कर  ताव '
फिन तो हिंये आबे अइत ना अगराव।

काँइप उठलक डर  के मारे फूल  थर थर 
झइर गेलयं तखने कतइ पाँख झर झर 
छाती लगाय कहलक जइर ठिनक भुइयाँ 
'रूप -रस -गंध  के हय खान एदे हिंयां।।

 [अगम बेस: page no. 68. नागपुरी काव्य संग्रह] 

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